Thursday, April 15, 2021

खुदीराम बोस: सबसे कम उम्र में भगवद गीता को साथ लेकर ये क्रांतिकारी हुआ शहीद🇮🇳🇮🇳


Jai Hind frnds🇮🇳🇮🇳

आप मेरे blog में उन सभी देश के जवानों के बारे में जानेंगे ....
जिन्होंने desh की सेवा में अपना सब कुछ बालिदान कर दिया ।

 तो जानते है ऐसे देश भक्त के बारे में🇮🇳🇮🇳....

खुदीराम बोस......


 हिंदुस्तान की आजादी के लिए ना जाने हमारे देश के कितने युवा फांसी पर चढ़ गए. उन्‍हीं में से एक ऐसा नाम है, जिसका जिक्र भले ही ना होता हो, लेकिन देश की आजादी के लिए सबसे कम उम्र का ये लड़का फांसी चढ़ गया था. हम बात कर रहे हैं महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस की. जो भारतीय स्वाधीनता के लिये मात्र 18 साल की उम्र में देश के लिए फांसी पर चढ़ गए. वह सबसे कम उम्र के उग्र और युवा क्रान्तिकारी देशभक्त माने जाते हैं.

आइए जानते हैं खुदीराम बोस के बारे में..

साल 1908 में 11 अगस्त के यह महान क्रांतिकारी शहीद हुए थे. 18 साल की उम्र में उन्हें फांसी दे दी गई थी. खुदीराम का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के बहुवैनी नामक गांव में बाबू त्रैलोक्यनाथ बोस के यहां हुआ था. उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था. बालक खुदीराम के मन में देश को आजाद कराने की ऐसी लगन लगी कि नौवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी और मुक्ति आंदोलन में कूद पड़े.

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